सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि मृत्यु पूर्व बयान विश्वसनीय और स्वैच्छिक है, तो मकसद के पुख्ता सबूतों के अभाव में भी यह अभियोजन के लिए हानिकारक नहीं होता। कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें पत्नी की हत्या के आरोपी चमन लाल को बरी किया गया था। SC ने कहा कि मकसद का महत्व मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित मामलों में होता है, प्रत्यक्ष साक्ष्य में नहीं।
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