सुप्रीम कोर्ट ने मासिक धर्म स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार घोषित किया है। कोर्ट ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों में लड़कियों को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने का आदेश दिया। साथ ही, स्कूलों में लड़के-लड़कियों के लिए अलग शौचालय, साबुन और पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। निजी स्कूलों द्वारा आरटीई एक्ट के उल्लंघन पर मान्यता रद्द होगी। केंद्र और राज्य सरकारों को तीन महीने में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
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